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🌿 The Science of Life — Ayur (Life) + Veda (Knowledge)

5 February 23 *SUVARNA PRASHNAM* - * Sri Sri Tattva AYUKANTI LEHYAM*

5 February 
*SUVARNA PRASHNAM* - 
* Sri Sri Tattva AYUKANTI LEHYAM*
 AVAILABLE

*( this ayurvedic dose given once in month on only pushy nakshtra - day )*

Can be taken by the children age of 6 month to 16 yrs 
 250 rs only 
 ( regency estate daily full day open)
( Sri Sri Tattva divine shop daily 5. 30 pm to 8.30 pm ) 
call first 8850284254 ..... ....
*Ayurvedic Immunity kit also available*


Ayurveda
9867396446

पुष्य नक्षत्र है ,विशेषकर इन दिन अपने बच्चों को स्वर्णप्राशन जरूर कराएं।

स्वर्णप्राशन औषधि का निर्माण *स्वर्ण भस्म , ब्राह्मी , गाय का घी , स्वर्ण माक्षिक , वचा आदि महत्वपूर्ण औषधियों* के द्वारा किया जाता है । इससे-
👉🏼 बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) विकसित होती है।
👉🏼 याददाश्त बढ़ती है।
👉🏼 बच्चे के स्वास्थ्य में सतत वृद्धि होती है।
👉🏼 कांति(ग्लो) बढ़ती है।
👉🏼 शक्ति बढ़ती है।
👉🏼 बुद्धिमान होते हैं।
👉🏼 ग्रहजनित (नजर लगना आदि) बाधाओं से रक्षा होती हैं।
👉🏼 पाचन ठीक रहता है आदि।

आप भी पुष्य नक्षत्र पर अपने प्यारे बच्चों को स्वर्णप्राशन औषधि का सेवन शुरू करा सकते हैं।

आयुर्वेद अपनाएं,स्वस्थ रहें...मस्त रहें..."स्वर्ण प्राशन"

यह एक प्राकृतिक हानिरहित आयुर्वेदिक टीकाकरण है जो बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में अत्यधिक लाभकारी होता है। आप भी शुरू करें।

आयुर्वेद में बच्चों को जन्म से 16 वर्ष तक प्रतिदिन स्वर्णप्राशन सेवन कराने का नियम बताया गया है। यह प्राकृतिक हानिरहित इम्यूनिटी बूस्टर होता है जो जीवन भर रोगों से रक्षा करता है।
जो इसका प्रतिदिन सेवन नहीं करा सकते हैं उनको प्रतिमाह आने वाले पुष्य नक्षत्र के दिन तो जरूर स्वर्णप्राशन का सेवन बच्चों को कराना चाहिए।
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Eternal Infinite Bliss

सर्वे भवन्तु सुखिनः

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु

मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

May all sentient beings be at peace,

may no one suffer from illness,

May all see what is auspicious, may no one suffer.

Om peace, peace, peace.

सभी सुखी होवें,

सभी रोगमुक्त रहें,

सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें

और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।

ॐ शांति शांति शांति॥