तर्क से किया गया सबसे बुरा कार्य युद्ध है। हर युद्ध का एक कारण होता है, और वह कारण युद्ध को सही ठहराता है। लेकिन तर्क सीमित है। मनुष्य को तर्क से परे जाना है, और तभी वह दिव्यता का अनुभव कर सकता है। और दिव्यता का मात्र स्वाद उसे युद्ध में शामिल होने से रोक सकता है।